सहस्रार से पहले क्या होता है? प्रकाश, नाद और ब्रह्म नाड़ी का रहस्य

Mahadev vaani

सहस्रार को कुंडलिनी यात्रा का अंतिम द्वार माना जाता है। लेकिन योग शास्त्रों में संकेत मिलता है कि सहस्रार से पहले चेतना एक अत्यंत सूक्ष्म गुप्त मार्ग से गुजरती है। इस मार्ग में साधक को भीतर प्रकाश, अनाहत नाद, शरीर और समय के बदलते अनुभव, सिद्धी का आकर्षण, आनंद का मायाजाल, चित्रिणी नाड़ी और अंत में ब