तुम न कर्ता हो, न भोक्ता | अष्टावक्र महागीता अध्याय 38

Osho Mahaan

तुम न कर्ता हो, न भोक्ता | अष्टावक्र महागीता अध्याय 38 अष्टावक्र महागीता के इस अध्याय 38 में, Osho जीवन के सबसे गहरे आध्यात्मिक सत्य को प्रकट करते हैं। मनुष्य स्वयं को कर्मों का कर्ता और अनुभवों का भोक्ता मानता है, यही भ्रम बंधन का कारण बनता है। अष्टावक्र कहते हैं कि तुम न कर्ता हो, न भोक्ता — तुम क